श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 491
 
 
श्लोक  3.4.491 
না জানি কে কোন্ দিকে নাচে গায বাঽয
না জানি কে কোন্ দিকে মহানন্দে ধায
ना जानि के कोन् दिके नाचे गाय वाऽय
ना जानि के कोन् दिके महानन्दे धाय
 
 
अनुवाद
कौन बता सकता है कि भक्तगण किस प्रकार नाचते, गाते, वाद्य बजाते और आनंद में दौड़ते थे?
 
Who can tell how the devotees danced, sang, played instruments and ran in joy?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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