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श्लोक 3.4.491  |
না জানি কে কোন্ দিকে নাচে গায বাঽয
না জানি কে কোন্ দিকে মহানন্দে ধায |
ना जानि के कोन् दिके नाचे गाय वाऽय
ना जानि के कोन् दिके महानन्दे धाय |
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| अनुवाद |
| कौन बता सकता है कि भक्तगण किस प्रकार नाचते, गाते, वाद्य बजाते और आनंद में दौड़ते थे? |
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| Who can tell how the devotees danced, sang, played instruments and ran in joy? |
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