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श्लोक 3.4.487  |
নব নব বস্ত্র সব দেখে প্রভু যত
সকল অনন্ত-লেখিবারে পারি কত |
नव नव वस्त्र सब देखे प्रभु यत
सकल अनन्त-लेखिबारे पारि कत |
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| अनुवाद |
| मैं उन असीमित प्रकार के नये कपड़ों का वर्णन करने में असमर्थ हूँ जिन्हें प्रभु ने देखा। |
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| I am unable to describe the infinite variety of new clothes that the Lord saw. |
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