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श्लोक 3.4.471  |
মনুষ্যেরো এতেক কি সম্পত্তি সম্ভবে!
এ সম্পত্তি সকলে সম্ভবে মহাদেবে |
मनुष्येरो एतेक कि सम्पत्ति सम्भवे!
ए सम्पत्ति सकले सम्भवे महादेवे |
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| अनुवाद |
| "एक साधारण मनुष्य ऐसा ऐश्वर्य कैसे प्राप्त कर सकता है? केवल महादेव ही ऐसे ऐश्वर्य के स्वामी हैं।" |
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| "How can an ordinary man attain such opulence? Only Mahadeva possesses such opulence." |
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