श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 449
 
 
श्लोक  3.4.449 
কেহ বলে,—“আমি সব ঘষিব চন্দন”
কেহ বলে,—“মালা আমি করিব গ্রন্থন”
केह बले,—“आमि सब घषिब चन्दन”
केह बले,—“माला आमि करिब ग्रन्थन”
 
 
अनुवाद
किसी ने कहा, “मैं चंदन की लकड़ी पीस लूँगा।” किसी ने कहा, “मैं फूलों की मालाएँ बनाऊँगा।”
 
Someone said, "I will grind sandalwood." Another said, "I will make garlands of flowers."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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