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श्लोक 3.4.445  |
নানা দিক্ হৈতে সজ্জ লাগিল আসিতে
হেন নাহি জানি কে আনযে কোন্ ভিতে |
नाना दिक् हैते सज्ज लागिल आसिते
हेन नाहि जानि के आनये कोन् भिते |
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| अनुवाद |
| सभी दिशाओं से सामग्री आती रही। कोई नहीं जानता था कि उन्हें कौन लाया या कहाँ से लाया। |
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| Materials kept coming in from all directions. No one knew who brought them or where they came from. |
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