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श्लोक 3.4.437  |
মাধব-পুরীর প্রেম—অকথ্য কথন
মেঘ-দরশনে মূর্চ্ছা হয সেই ক্ষণ |
माधव-पुरीर प्रेम—अकथ्य कथन
मेघ-दरशने मूर्च्छा हय सेइ क्षण |
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| अनुवाद |
| माधव पुरी का परमानंदपूर्ण प्रेम वर्णन से परे है। बादल देखते ही वे अचेत हो जाते थे। |
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| Madhava Puri's ecstatic love is beyond description. He would faint at the sight of clouds. |
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