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श्लोक 3.4.423  |
ঽজ্ঞানী যোগী তপস্বী সন্ন্যাসীঽ খ্যাতি যার
কার মুখে নাহি দাস্য-মহিমা-প্রচার |
ऽज्ञानी योगी तपस्वी सन्न्यासीऽ ख्याति यार
कार मुखे नाहि दास्य-महिमा-प्रचार |
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| अनुवाद |
| यहाँ तक कि ज्ञानी, योगी, तपस्वी और संन्यासी भी कभी भगवान की सेवा की महिमा के विषय में नहीं बोले। |
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| Even the wise men, yogis, ascetics and sannyasis never spoke about the glory of serving God. |
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