श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 398
 
 
श्लोक  3.4.398 
মাধবেন্দ্র-অদ্বৈতে যদ্যপি ভেদ নাই
তথাপি তাহান শিষ্য-আচার্য-গোসাঞি
माधवेन्द्र-अद्वैते यद्यपि भेद नाइ
तथापि ताहान शिष्य-आचार्य-गोसाञि
 
 
अनुवाद
यद्यपि माधवेन्द्र और अद्वैत में कोई अंतर नहीं है, फिर भी आचार्य गोसांई माधवेन्द्र के शिष्य थे।
 
Although there is no difference between Madhavendra and Advaita, still Acharya Gosai was a disciple of Madhavendra.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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