श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 395
 
 
श्लोक  3.4.395 
যে গায, যে শুনে, এ সকল পুণ্য-কথা
বৈষ্ণবাপরাধ তার না জন্মে সর্বথা
ये गाय, ये शुने, ए सकल पुण्य-कथा
वैष्णवापराध तार ना जन्मे सर्वथा
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य इन शुभ विषयों का कीर्तन करता है या सुनता है, वह कभी भी वैष्णवों का अपराध नहीं करता।
 
A person who chants or listens to these auspicious topics never commits any offense against the Vaishnavas.
तात्पर्य
परम भगवान के भक्तों में भेद-भाव या परम भगवान की सेवा में भेद-भाव करने पर वैष्णव-अपराध लगता है | परन्तु हरि, गुरु व वैष्णव में अभेद-भाव समझ लेने पर अपराध लगता ही नहीं | ऐसा व्यक्ति कभी वैष्णव-अपराध नहीं कर सकता |
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)