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श्लोक 3.4.392  |
এক হস্তে ঈশ্বরের সেবযে কেবল
আর হস্তে দুঃখ দিলে তার কি কুশল? |
एक हस्ते ईश्वरेर सेवये केवल
आर हस्ते दुःख दिले तार कि कुशल? |
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| अनुवाद |
| यदि कोई एक हाथ से भगवान की सेवा करे और दूसरे हाथ से उन्हें कष्ट दे, तो उसे कैसे लाभ हो सकता है? |
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| If one serves God with one hand and troubles Him with the other, how can he benefit? |
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