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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन
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श्लोक 317
श्लोक
3.4.317
“পড গুপ্ত, রাঘবেন্দ্র বর্ণিযাছ তুমি
অষ্ট-শ্লোক করিযাছ, শুনিযাছি আমি”
“पड गुप्त, राघवेन्द्र वर्णियाछ तुमि
अष्ट-श्लोक करियाछ, शुनियाछि आमि”
अनुवाद
हे गुप्त! मैंने सुना है कि आपने राघवेन्द्र का वर्णन करते हुए आठ श्लोक रचे हैं। कृपया उन्हें सुनाइए।
O Gupta, I have heard that you have composed eight verses describing Raghavendra. Please recite them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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