श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 302
 
 
श्लोक  3.4.302 
সেই প্রভু কলি-যুগে—অবধূত রায
সূত্র মাত্র লিখি আমি তাহান আজ্ঞায
सेइ प्रभु कलि-युगे—अवधूत राय
सूत्र मात्र लिखि आमि ताहान आज्ञाय
 
 
अनुवाद
वही भगवान कलियुग में अवधूत नित्यानन्द प्रभु के रूप में प्रकट हुए हैं। उन्हीं के आदेश से मैं इन लीलाओं का सारांश मात्र लिख रहा हूँ।
 
The same Lord appeared in the Kali Yuga as Avadhuta Nityananda Prabhu. At his behest, I am merely summarizing these pastimes.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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