श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 297
 
 
श्लोक  3.4.297 
ঽপটলঽ ঽবাস্তুকঽ ঽকালঽ শাকের ভোজনে
জন্ম জন্ম বিহরযে বৈষ্ণবের সনে
ऽपटलऽ ऽवास्तुकऽ ऽकालऽ शाकेर भोजने
जन्म जन्म विहरये वैष्णवेर सने
 
 
अनुवाद
पाताल, वास्तु और काल शाक का सेवन करने से मनुष्य जन्म-जन्मान्तर तक वैष्णवों की संगति का आनंद उठाता है।
 
By consuming Patala, Vastu and Kaal Shaak, a person enjoys the company of Vaishnavas for many births.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)