श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 292
 
 
श्लोक  3.4.292 
প্রত্যেকে প্রত্যেকে প্রভু সকল ব্যঞ্জন
মহা আমোদিযা নাথ করেন ভোজন
प्रत्येके प्रत्येके प्रभु सकल व्यञ्जन
महा आमोदिया नाथ करेन भोजन
 
 
अनुवाद
भगवान ने प्रत्येक सब्जी का स्वाद बड़ी संतुष्टि के साथ लिया।
 
The Lord tasted each vegetable with great satisfaction.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)