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श्लोक 3.4.267  |
আইর ভক্তির সীমা কে বলিতে পারে
গৌরচন্দ্র অবতীর্ণ যাঙ্হার উদরে |
आइर भक्तिर सीमा के बलिते पारे
गौरचन्द्र अवतीर्ण याङ्हार उदरे |
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| अनुवाद |
| गौरचन्द्र माता शची के गर्भ से प्रकट हुए थे, अतः उनकी भक्ति का विस्तार कौन बता सकता है? |
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| Gaurachandra was born from the womb of Mother Shachi, so who can tell the extent of his devotion? |
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