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श्लोक 3.4.201  |
ক্ষণেকে অচ্যুতানন্দ-অদ্বৈত-কুমার
প্রভুর চরণে আসিঽ হৈলা নমস্কার |
क्षणेके अच्युतानन्द-अद्वैत-कुमार
प्रभुर चरणे आसिऽ हैला नमस्कार |
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| अनुवाद |
| इसके कुछ ही समय बाद अद्वैत के पुत्र अच्युतानन्द आये और भगवान के चरणकमलों में प्रणाम किया। |
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| Shortly after this, Achyutananda, the son of Advaita, came and bowed at the lotus feet of the Lord. |
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