श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 200
 
 
श्लोक  3.4.200 
যে আনন্দ উপজিল অদ্বৈতের ঘরে
বেদব্যাস বিনা তাহা বর্ণিতে কে পারে?
ये आनन्द उपजिल अद्वैतेर घरे
वेदव्यास विना ताहा वर्णिते के पारे?
 
 
अनुवाद
वेदव्यास के अलावा कोई भी अद्वैत के घर में प्रकट हुए परमानंद का वर्णन करने में सक्षम नहीं है।
 
No one except Veda Vyasa is able to describe the bliss that manifests in the house of Advaita.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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