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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन
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श्लोक 198
श्लोक
3.4.198
নিত্যানন্দে অদ্বৈতে হৈল কোলাকুলি
দুঙ্হা দেখিঽ অন্তরেতে দোঙ্হে কুতূহলী
नित्यानन्दे अद्वैते हैल कोलाकुलि
दुङ्हा देखिऽ अन्तरेते दोङ्हे कुतूहली
अनुवाद
नित्यानंद और अद्वैत गले मिले। एक-दूसरे को देखकर दोनों बहुत खुश हुए।
Nityananda and Advaita embraced each other, both delighted to see each other.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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