श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 197
 
 
श्लोक  3.4.197 
বসিলেন মহাপ্রভু উত্তম আসনে
চতুর্-দিকে শোভা করে পারিষদ-গণে
वसिलेन महाप्रभु उत्तम आसने
चतुर्-दिके शोभा करे पारिषद-गणे
 
 
अनुवाद
जैसे ही महाप्रभु उस सुन्दर आसन पर बैठे, उनके पार्षदों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया।
 
As soon as Mahaprabhu sat on that beautiful seat, his councillors surrounded him from all sides.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)