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श्लोक 3.4.162  |
অনন্ত ব্রহ্মাণ্ড সেই চৈতন্য-ইচ্ছায
সব চৈতন্যের লোম-কূপেতে মিশায |
अनन्त ब्रह्माण्ड सेइ चैतन्य-इच्छाय
सब चैतन्येर लोम-कूपेते मिशाय |
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| अनुवाद |
| “भगवान चैतन्य की परम इच्छा से असंख्य ब्रह्माण्ड उनके शरीर के रोम छिद्रों में प्रवेश करते हैं। |
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| “By the supreme will of Lord Chaitanya, innumerable universes enter the pores of His body. |
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