श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 157
 
 
श्लोक  3.4.157 
কোন্ বা সাহসে তুমি এ-মত বচন
জিহ্বায আনিলা, ইহা না বুঝি কারণ
कोन् वा साहसे तुमि ए-मत वचन
जिह्वाय आनिला, इहा ना बुझि कारण
 
 
अनुवाद
"तुमने ऐसा कहने की हिम्मत कैसे की? मुझे इसका कारण समझ नहीं आ रहा।"
 
"How dare you say that? I don't understand the reason."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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