श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 144
 
 
श्लोक  3.4.144 
ন্যাসী বলে,—“আগে আছে জিজ্ঞাস্য আমার”
আচার্য বলেন,—“বল যে ইচ্ছা তোমার”
न्यासी बले,—“आगे आछे जिज्ञास्य आमार”
आचार्य बलेन,—“बल ये इच्छा तोमार”
 
 
अनुवाद
संन्यासी ने कहा, “मैं पहले अपना प्रश्न पूछूँगा।” अद्वैत आचार्य ने उत्तर दिया, “जैसी आपकी इच्छा।”
 
The monk said, “I will ask my question first.” Advaita Acharya replied, “As you wish.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)