श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 130
 
 
श्लोक  3.4.130 
এই মত প্রভু কত-দিন সেই গ্রামে
নির্ভযে আছেন নিজ-কীর্তন-বিধানে
एइ मत प्रभु कत-दिन सेइ ग्रामे
निर्भये आछेन निज-कीर्तन-विधाने
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान ने उस गाँव में निर्भय होकर संकीर्तन लीला का आनंद लेते हुए कुछ और दिन बिताए।
 
Thus the Lord spent a few more days in that village fearlessly enjoying the Sankirtana pastimes.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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