श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.4.1 
জয জয কৃপা-সিন্ধু জয গৌরচন্দ্র
জয জয সকল-মঙ্গল-পদ-দ্বন্দ্ব
जय जय कृपा-सिन्धु जय गौरचन्द्र
जय जय सकल-मङ्गल-पद-द्वन्द्व
 
 
अनुवाद
दया के सागर गौरचन्द्र की जय हो! उनके सर्वमंगलमय चरणकमलों की जय हो!
 
All hail Gaurachandra, the ocean of mercy! All hail his all-auspicious feet!
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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