श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  3.2.95 
রামচন্দ্র খাঙ্ন বলে,—“শুন মহাশয!
যে আজ্ঞা তোমার সে-ই কর্তব্য নিশ্চয
रामचन्द्र खाङ्न बले,—“शुन महाशय!
ये आज्ञा तोमार से-इ कर्तव्य निश्चय
 
 
अनुवाद
रामचन्द्र खाँ ने उत्तर दिया, "सुनो महाशय! आप जो आदेश दें, उसका पालन करना मेरा कर्तव्य है।"
 
Ramchandra Khan replied, "Listen sir! It is my duty to obey whatever orders you give."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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