श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  3.2.94 
বহযে আনন্দ-ধারা কহিতে কহিতে
ঽনীলাচলচন্দ্রঽ, বলিঽ পডিলা ভূমিতে
वहये आनन्द-धारा कहिते कहिते
ऽनीलाचलचन्द्रऽ, बलिऽ पडिला भूमिते
 
 
अनुवाद
भगवान् कहते हुए उनकी आँखों से प्रेमाश्रु बहने लगे। फिर वे भूमि पर गिर पड़े और बोले, "हे नीलचलचन्द्र!"
 
As the Lord spoke, tears of love flowed from his eyes. Then he fell to the ground and said, "O Blue Moon!"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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