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श्लोक 3.2.86  |
“হা হা জগন্নাথ”, প্রভু বলে ঘনে ঘন
পৃথিবীতে পডিঽ ঘন করযে ক্রন্দন |
“हा हा जगन्नाथ”, प्रभु बले घने घन
पृथिवीते पडिऽ घन करये क्रन्दन |
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| अनुवाद |
| भगवान भूमि पर गिर पड़े और बार-बार “हे जगन्नाथ!” कहते हुए बहुत रोये। |
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| The Lord fell on the ground and cried profusely, repeatedly saying, “O Jagannatha!” |
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