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श्लोक 3.2.52  |
রহিলেন আসিঽ প্রভু তাঙ্হার আলযে
কি কহিব আর তাঙ্র ভাগ্য-সমুচ্চযে |
रहिलेन आसिऽ प्रभु ताङ्हार आलये
कि कहिब आर ताङ्र भाग्य-समुच्चये |
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| अनुवाद |
| भगवान् उसके घर आकर ठहरे। उसके सौभाग्य की सीमा का वर्णन कौन कर सकता है? |
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| The Lord came and stayed at his house. Who can describe the extent of his good fortune? |
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