श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 502
 
 
श्लोक  3.2.502 
শেষ-খণ্ডে চৈতন্য আইলা নীলাচলে
এ আখ্যান শুনিলে ভাসযে প্রেম-জলে
शेष-खण्डे चैतन्य आइला नीलाचले
ए आख्यान शुनिले भासये प्रेम-जले
 
 
अनुवाद
जो कोई भी भगवान चैतन्य की नीलांचल यात्रा के इन अन्त्यखण्ड वर्णनों को सुनेगा, वह भगवान के प्रेम के सागर में तैर जाएगा।
 
Whoever listens to these Antyakhand descriptions of Lord Chaitanya's Nilachal Yatra will float in the ocean of love for the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)