vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,
»
श्लोक 502
श्लोक
3.2.502
শেষ-খণ্ডে চৈতন্য আইলা নীলাচলে
এ আখ্যান শুনিলে ভাসযে প্রেম-জলে
शेष-खण्डे चैतन्य आइला नीलाचले
ए आख्यान शुनिले भासये प्रेम-जले
अनुवाद
जो कोई भी भगवान चैतन्य की नीलांचल यात्रा के इन अन्त्यखण्ड वर्णनों को सुनेगा, वह भगवान के प्रेम के सागर में तैर जाएगा।
Whoever listens to these Antyakhand descriptions of Lord Chaitanya's Nilachal Yatra will float in the ocean of love for the Lord.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×