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श्लोक 3.2.497  |
জন্ম জন্ম সার্বভৌম প্রভুর পার্ষদ
অন্যথা অন্যের নাহি হয এ সম্পদ |
जन्म जन्म सार्वभौम प्रभुर पार्षद
अन्यथा अन्येर नाहि हय ए सम्पद |
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| अनुवाद |
| सार्वभौम तो जन्म-जन्मान्तर तक भगवान का सहयोगी रहा है। अन्यथा ऐसा सौभाग्य और किसको प्राप्त हो सकता है? |
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| The universal being has been God's companion for many lifetimes. Who else could have such good fortune? |
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