श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 496
 
 
श्लोक  3.2.496 
এই মত বলিঽ প্রভু মহাপ্রেম-রসে
লাফরা খাযেন প্রভু, ভক্ত-গণ হাসে
एइ मत बलिऽ प्रभु महाप्रेम-रसे
लाफरा खायेन प्रभु, भक्त-गण हासे
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर भगवान् प्रेमपूर्वक उबली हुई सब्जियाँ खाने लगे और भक्तजन हँसने लगे।
 
Saying this, the Lord lovingly started eating the boiled vegetables and the devotees started laughing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)