श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  3.2.46 
জ্বর-বেদনায কোথা থাকিল ভক্ষণ
অতএব ঈশ্বরের ইচ্ছা সে কারণ
ज्वर-वेदनाय कोथा थाकिल भक्षण
अतएव ईश्वरेर इच्छा से कारण
 
 
अनुवाद
"वह ज्वर की पीड़ा सहते हुए कैसे खा सकता है? अतः परमेश्वर की इच्छा ही प्रबल होती है।"
 
"How can he eat while suffering from fever? So God's will prevails."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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