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श्लोक 3.2.455  |
যথাযোগ্য সম্ভাষা করিযা সবাঽ-সনে
বসিলেন, সন্দেহ ভাঙ্গিল তত-ক্ষণে |
यथायोग्य सम्भाषा करिया सबाऽ-सने
वसिलेन, सन्देह भाङ्गिल तत-क्षणे |
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| अनुवाद |
| भक्तों का यथोचित अभिवादन करके सार्वभौम बैठ गये और उनका संदेह दूर हो गया। |
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| After greeting the devotees appropriately, Sarvabhauma sat down and his doubts were dispelled. |
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