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श्लोक 3.2.436  |
প্রভু সে হৈযা আছেন অচেতন-প্রায
দেখিঽ মাত্র জগন্নাথ-নিজ-প্রিয-কায |
प्रभु से हैया आछेन अचेतन-प्राय
देखिऽ मात्र जगन्नाथ-निज-प्रिय-काय |
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| अनुवाद |
| जिस क्षण भगवान ने अपने प्रिय जगन्नाथ का रूप देखा, वे अचेत हो गये। |
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| The moment the Lord saw the form of his beloved Jagannath, he became unconscious. |
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