श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 427
 
 
श्लोक  3.2.427 
হেন-কালে গৌরচন্দ্র জগত-জীবন
দেখিলেন জগন্নাথ, সুভদ্রা, সঙ্কর্ষণ
हेन-काले गौरचन्द्र जगत-जीवन
देखिलेन जगन्नाथ, सुभद्रा, सङ्कर्षण
 
 
अनुवाद
तभी ब्रह्माण्ड के प्राण और आत्मा गौरचन्द्र, जगन्नाथ, सुभद्रा और संकर्षण (बलदेव) से मिलने आये।
 
Then the life and soul of the universe came to meet Gaurachandra, Jagannath, Subhadra and Sankarshana (Baldev).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)