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श्लोक 3.2.412  |
সে দিনের যে আছাড, যে আর্তি-ক্রন্দন
অনন্তের জিহ্বায সে না যায বর্ণন |
से दिनेर ये आछाड, ये आर्ति-क्रन्दन
अनन्तेर जिह्वाय से ना याय वर्णन |
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| अनुवाद |
| यहां तक कि अनंत भी यह वर्णन नहीं कर सकते कि उस दिन वे किस प्रकार बलपूर्वक भूमि पर गिर पड़े और किस प्रकार दयनीय रूप से रोये। |
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| Even Ananta cannot describe how he fell forcefully on the ground and cried pitifully that day. |
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