श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.2.40 
প্রভু বলে,—“কাহারো যে কিছু না লৈলাইহাতে
আমার বড সন্তোষ করিলা
प्रभु बले,—“काहारो ये किछु ना लैलाइहाते
आमार बड सन्तोष करिला
 
 
अनुवाद
प्रभु ने कहा, “मुझे इस बात से बहुत संतोष है कि तुममें से किसी ने किसी से कुछ नहीं लिया।
 
The Lord said, “I am very satisfied that none of you took anything from anyone.
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