श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 393
 
 
श्लोक  3.2.393 
সেই ক্ষেত্র আমার পরম প্রিয স্থান
মোর প্রীতে তথায থাকিবে সর্ব-ক্ষণ
सेइ क्षेत्र आमार परम प्रिय स्थान
मोर प्रीते तथाय थाकिबे सर्व-क्षण
 
 
अनुवाद
वह स्थान मुझे अत्यंत प्रिय है। मेरी प्रसन्नता के लिए तुम सदैव वहीं निवास करो।
 
That place is very dear to me. For my happiness, you should always reside there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)