श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 380
 
 
श्लोक  3.2.380 
শুনিযা অদ্ভুত পুরী-মহিমাশঙ্কর
পুনঃশ্রী-চরণ ধরিঽ করিলা উত্তর
शुनिया अद्भुत पुरी-महिमाशङ्कर
पुनःश्री-चरण धरिऽ करिला उत्तर
 
 
अनुवाद
जगन्नाथपुरी की अद्भुत महिमा सुनकर शंकरजी पुनः भगवान के चरणकमलों को पकड़कर बोले।
 
Hearing the wonderful glory of Jagannathpuri, Shankarji again held the lotus feet of the Lord and spoke.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)