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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,
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श्लोक 365
श्लोक
3.2.365
একাম্রক-বন-নাম-স্থান মনোহর
তথায হৈবা তুমি কোটি-লিঙ্গেশ্বর
एकाम्रक-वन-नाम-स्थान मनोहर
तथाय हैबा तुमि कोटि-लिङ्गेश्वर
अनुवाद
"उस मनोरम स्थान का नाम एकाम्रक वन है। आप वहाँ कोटि-लिंगेश्वर के रूप में निवास करेंगे।"
"The name of that beautiful place is Ekaamraka forest. You will reside there as Koti-Lingeshwara."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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