श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 350
 
 
श्लोक  3.2.350 
শুনিযা প্রভুর কিছু সক্রোধ উত্তর
অন্তরে কম্পিত বড হৈলাশঙ্কর
शुनिया प्रभुर किछु सक्रोध उत्तर
अन्तरे कम्पित बड हैलाशङ्कर
 
 
अनुवाद
भगवान के क्रोध भरे वचन सुनकर शंकर भय से काँपने लगे।
 
Hearing the angry words of God, Shankar started trembling with fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)