যার মন্ত্রে সকল মূর্তিতে বৈসে প্রাণ
সেই প্রভু—শ্রী-কৃষ্ণ-চৈতন্যচন্দ্র নাম
यार मन्त्रे सकल मूर्तिते वैसे प्राण
सेइ प्रभु—श्री-कृष्ण-चैतन्यचन्द्र नाम
अनुवाद
परम प्रभु के पवित्र नामों के कीर्तन से उनके विग्रह रूपों में जीवन का आह्वान किया जाता है। वे प्रभु अब श्रीकृष्ण चैतन्य के रूप में अवतरित हुए हैं।
Chanting the holy names of the Supreme Lord invokes life in His Vigraha forms. That Lord has now incarnated as Sri Krishna Chaitanya.
तात्पर्य
सर्वोच्च प्रभु के देवता रूप में जीवन का आह्वान करने की प्रणाली, श्री गौर द्वारा दिए गए महामंत्र, का उच्चारण श्री गौड़ीय-सम्प्रदाय में किया जाता है। प्रभु के पवित्र नामों का उच्चारण किए बिना, यह अवधारणा कि अर्चा-विग्रह पत्थर से बना है, गायब नहीं होती है। श्री कृष्ण चैतन्यदेव ने कृष्ण-वर्णं त्विषाकृष्णं श्लोक की अवधारणाओं के अनुसार जो पूजा के नियम और विनियम निर्धारित किए हैं, उनमें केवल महामंत्र का उच्चारण करने पर आधारित भगवान की देवता की जीवंत और उचित पूजा शामिल है। जहाँ कहीं भी भगवान की सेवा उपासक की शारीरिक भागीदारी के बिना की जाती है या जहाँ पूजा औपचारिकता के रूप में की जाती है, ऐसी पूजा और ऐसे देवता जीवन से रहित होते हैं। श्री गौरसुंदर द्वारा उपदेशित हरे कृष्ण महामंत्र का उच्चारण करना एक उपासक के लिए पूजा का सबसे जीवंत रूप है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥