साक्षीगोपाल के मधुर, मोहक रूप को देखकर भगवान ने हर्षपूर्वक गर्जना की।
Seeing the sweet, charming form of Sakshigopal, the Lord roared with joy.
तात्पर्य
महानादी नदी कटक के उत्तरी किनारे से बहती है। श्रीमान महाप्रभु के समय में साक्षी-गोपाल की देवता कटक में थी। बाद में इस देवता को साक्षी-गोपाल नामक गांव में स्थानांतरित कर दिया गया। श्री महाप्रभु के लुप्त होने के बाद साक्षी-गोपाल की यह देवता पहले जगन्नाथ मंदिर में लाई गई और बाद में एक अलग गांव में स्थापित की गई।
इस देवता का एक बड़ा, चार-सशस्त्र रूप है। साक्षी-गोपाल की पुरानी कथा श्री चैतन्य-चरितामृत, मध्य-लीला, अध्याय पाँच में वर्णित है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥