श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 287
 
 
श्लोक  3.2.287 
প্রথমে দশাশ্বমেধ ঘাটে ন্যাসি-মণি
স্নান করিলেন ভক্ত-সṁহতি আপনি
प्रथमे दशाश्वमेध घाटे न्यासि-मणि
स्नान करिलेन भक्त-सꣳहति आपनि
 
 
अनुवाद
संन्यासियों के शिखर रत्न ने भक्तों के साथ सबसे पहले दशाश्वमेधघाट पर स्नान किया।
 
The topmost among the monks, Ratna, first took bath at Dashashwamedh Ghat along with the devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)