श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 277
 
 
श्लोक  3.2.277 
রেমুণায দেখিঽ নিজ-মূর্তি গোপীনাথ
বিস্তর করিলা নৃত্য ভক্ত-বর্গ সাথ
रेमुणाय देखिऽ निज-मूर्ति गोपीनाथ
विस्तर करिला नृत्य भक्त-वर्ग साथ
 
 
अनुवाद
जब भगवान ने रेमुना में अपने गोपीनाथ रूप को देखा, तो वे भक्तों के साथ आनंद में नाचने लगे।
 
When the Lord saw His Gopinatha form in Remuna, He started dancing in joy along with the devotees.
तात्पर्य
महाप्रभु ने स्वयं गोपीनाथ की मूर्ति के सामने नृत्य करके भक्तों को उपासना के नियम सिखाए। चूँकि श्री गोपीनाथ गौरासुंदर के अर्चा-विग्रह हैं, इसलिए इस वाक्यांश निज-मूर्ति गोपीनाथ—"गोपीनाथ की अपनी आकृति," का उपयोग किया गया है। श्री चैतन्यदेव प्रत्यक्ष रूप से गोपीनाथ हैं, नंदा महाराज के पुत्र। गौड़ीय-नाथ और गोपीनाथ एक ही हैं। दोनों परमेश्वर सर्वोच्च व्यक्तित्व हैं। हालांकि वे क्रमशः उदार और मधुर लीलाओं का प्रदर्शन करते हैं, फिर भी वे एक हैं। गौरासुंदर के रूप को श्री गोपीनाथ का अलग अवतार नहीं कहा जा सकता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)