श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 269
 
 
श्लोक  3.2.269 
শাক্ত বলে,—“চল ঝাট মঠেতে আমার
সবেই ঽআনন্দঽ আজি করিব অপার”
शाक्त बले,—“चल झाट मठेते आमार
सबेइ ऽआनन्दऽ आजि करिब अपार”
 
 
अनुवाद
शाक्त ने कहा, "चलो अब मेरे मठ में चलें। हम सब मिलकर खूब सारा 'आनंद' पीएँगे।"
 
Shakta said, "Let's go to my monastery now. We will all drink a lot of 'Anand' together."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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