श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.2.26 
প্রভুর নযন-জলে সর্ব ভক্ত-গণ
সিঞ্চিত হৈযা অঙ্গ করেন ক্রন্দন
प्रभुर नयन-जले सर्व भक्त-गण
सिञ्चित हैया अङ्ग करेन क्रन्दन
 
 
अनुवाद
सभी भक्तगण भगवान के आँसुओं से भीग गये और रोने लगे।
 
All the devotees got drenched in the tears of God and started crying.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)