श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 250
 
 
श्लोक  3.2.250 
এবে সে শিবের পুর হৈল সফল
যাহে নৃত্য করে বৈকুণ্ঠের অধীশ্বর
एबे से शिवेर पुर हैल सफल
याहे नृत्य करे वैकुण्ठेर अधीश्वर
 
 
अनुवाद
अब चूँकि वैकुण्ठ के भगवान स्वयं वहाँ नृत्य कर रहे थे, इसलिए शिव का वह धाम पूर्ण हो गया।
 
Now since the Lord of Vaikuntha himself was dancing there, that abode of Shiva became complete.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)