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श्लोक 3.2.249  |
সে বিকার কহিতে বাশক্তি আছে কার
নযনে বহযে সুরধুনী-শত-ধার |
से विकार कहिते वाशक्ति आछे कार
नयने वहये सुरधुनी-शत-धार |
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| अनुवाद |
| भगवान के प्रेमरूपी रूपान्तरण का वर्णन कौन कर सकता है? उनके नेत्रों से गंगा की सैकड़ों धाराओं के समान अश्रुधारा बह रही थी। |
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| Who can describe the Lord's transformation into love? Tears flowed from His eyes like hundreds of streams of the Ganges. |
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