श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 238
 
 
श्लोक  3.2.238 
জলেশ্বর পূজিতে আছেন বিপ্র-গণে
গন্ধ-পুষ্প-ধূপ-দীপ-মালা-বিভূষণে
जलेश्वर पूजिते आछेन विप्र-गणे
गन्ध-पुष्प-धूप-दीप-माला-विभूषणे
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण पुजारी चंदन, फूल, धूप, घी के दीपक, माला और आभूषणों से जलेश्वर शिव की पूजा में लगे हुए थे।
 
Brahmin priests were engaged in worshipping Jaleshwar Shiva with sandalwood, flowers, incense, ghee lamps, garlands and ornaments.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)